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Saturday, 28 May 2016

ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन : कारण और परिणाम

 earth
ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन : कारण और परिणाम

कोई भी गैस जो सूर्य से आने वाले लघुतरंगीय विकिरण को तो पृथ्वी पर आने देती है,लेकिन पृथ्वी से वापस जाने वाले दीर्घतरंगीय विकिरण को अवशोषित कर पृथ्वी के तापमान को बढ़ा देती है, ग्रीनहाउस गैस कहलाती है | वर्तमान में मानवीय कारणों से वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की बढ़ती मात्रा वैश्विक तापन व जलवायु परिवर्तन का कारण बन गयी है | इनकी मात्रा को अगर नियंत्रित न किया गया तो यह मानव के साथ साथ सम्पूर्ण जीव-जगत के लिए घातक साबित होंगी|

ग्रीनहाउस प्रभाव

पृथ्वी के वायुमंडल में उपस्थित ग्रीनहाउस गैसों के कारण पृथ्वी से उत्सर्जित होने वाले ताप के अवशोषण और वायुमंडलीय तापमान में वृद्धि की घटना को ग्रीनहाउस प्रभाव कहते हैं |वास्तव में ग्रीनहाउस प्रभाव की घटना के कारण ही पृथ्वी पर तापमान नियंत्रित रहता है और पौधों आदि को उनकी वृद्धि के लिए आवश्यक ताप की प्राप्ति हो पाती है |

ग्रीनहाउस गैसें

वातावरण में प्रकृतिक रूप से पायी जाने वाली ग्रीनहाउस गैसें (GHG) निम्नलिखित हैं:

  • कार्बन डाई ऑक्साइड (CO2) (सबसे प्रमुख ग्रीनहाउस गैस)
  • मीथेन (CH4)
  • जल वाष्प
  • नाइट्रस ऑक्साइड (N2O)
  • फ्लुओरीनीकृत गैसें
मानव द्वारा निर्मित या संश्लेषित ग्रीन हाउस गैसें निम्नलिखित हैं :
  • क्लोरोफ़्लोरोकार्बन (CFCs)
  • हाइड्रो फ़्लोरोकार्बन (HFCs)
  • पर फ़्लोरोकार्बन’ (PFCs)
  • सल्फर हेक्साक्लोराइड (SF6)
  • वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा में वृद्धि के कारण
    ग्रीनहाउस गैसों का पृथ्वी के वायुमण्डल पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है, क्योंकि ये गैसें पृथ्वी के लिए कंबल का कार्य करती हैं| यदि ये गैसें उपस्थित न हों और ये ताप का अवशोषण न करें तो पृथ्वी एक ठंडे ग्रह में बादल जाएगी और मानव जीवन अपने वर्तमान स्वरूप में नहीं रह पाएगा | अतः ग्रीनहाउस गैसें हमेशा से वायुमंडल में उपस्थित रही हैं और हमेशा से ग्रीनहाउस प्रभाव द्वारा पृथ्वी के एक निश्चित तापमान को बनाए रखा है | प्राकृतिक रूप से पायी जाने वाली ग्रीनहाउस गैसें पृथ्वी के तापमान को एकाएक नहीं बदलती हैं| 
    लेकिन 19वीं व 20वीं सदी में मानवीय गतिविधियों से उत्सर्जित ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा के वायुमंडल में मिलने से वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा में वृद्धि होती गयी | इसका परिणाम वैश्विक तापन (Global Warming) व अन्य जलवायविक परिवर्तनों के रूप में वर्तमान में उपस्थित है | वैश्विक तापन से तात्पर्य पृथ्वी के दीर्घकालिक औसत तापमान में वृद्धि होना है |
    ग्रीनहाउस गैसों में वृद्धि के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं :
    • औद्योगिकीकरण
    • नगरीकरण
    • उपभोक्तावादी संस्कृति
    • वाहनों में जीवाश्म ईंधनों के जलने से उत्पन्न धुआँ
    • वनों का विनाश
    ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के उपाय
    • ग्रीनहाउस गैसों  के उत्सर्जन को कम कर वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा को नियंत्रित करना आज की आवश्यकता बन चुकी है, ताकि वैश्विक तापन के दुष्प्रभावों से बचा जा सके| ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के उपाय निम्नलिखित हैं 

    • नवीकरणीय व न्यून प्रदूषणकारी ऊर्जा स्रोतों का अधिक प्रयोग किया जाए
    • टेलीविज़न, रेफ्रीजरेटर, एयर-कंडीशनर आदि ग्रीनहाउस गैसों को उत्सर्जित करने वाली उपभोक्ता वस्तुओं का कम से कम प्रयोग किया जाए
    • वाहनों का कम प्रयोग किया जाए या फिर सीएनजी जैसे कम प्रदूषणकारी ईंधन का वाहनों में प्रयोग किया जाए
    • वनीकरण को बढ़ावा दिया जाए, क्योंकि वृक्ष कार्बन डाई ऑक्साइड जैसी ग्रीनहाउस गैसों को अवशोषित करते हैं  
    • ऊर्जा का विवेकपूर्ण व सतत प्रयोग किया जाए
    • गहरे महासागरों में कार्बन डाई ऑक्साइड का निस्तारण (Disposal),जहाँ वे निम्न तापमान व उच्च दबाव में अर्ध-स्थायी यौगिकों में बदल जाती हैं |


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